मंगलवार, 30 अगस्त 2022

गणेश चतुर्थी कब है इसे क्यों मनाया जाता है? श्री गणेश जी की पूरी कहानी हिंदी में…..


 Ganesh Chaturthi 2022 Date Kab Hai, Time, Puja Muhurat

 गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है, यह असल में एक हिंदू त्योहार है. इस त्योहार के दौरान लोग भगवान गणेश की बहुत भक्ति करते हैं. गणेश चतुर्थी की शुरुआत वैदिक भजनों, प्रार्थनाओं और हिंदू ग्रंथों जैसे गणेश उपनिषद से होती है. प्रार्थना के बाद गणेश जी को मोदक का भोग लगाकर, मोदक को लोगो में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है. 

      ( गणेश चतुर्थी कब है 2022 ): 

हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल गणेश चतुर्थी का उत्सव 31 अगस्त को मनाया जाएगा। ऐसी मान्यता है, कि इसी व्रत को करने से माता पार्वती को उनके प्रथम पुत्र कार्तिकेय मिलने आए थे। जानें गणेश चतुर्थी की डेट और पूजा मुहूर्त। 

गणेश चतुर्थी की पूजा हर साल भारत में बड़ी धूमधाम के साथ मनाई जाती है। हिंदुओं के लिए यह दिन बहुत खास होता है। धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो इसी दिन भगवान श्री गणेश का जन्म हुआ था। यह पूजा हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। कुछ पौराणिक कथा के अनुसार इसी दिन भगवान श्री गणेश को प्रथम पूजनीय भगवान का दर्जा भी मिला था। यह पूजा 10 दिनों तक मनाई जाती है। अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा का धूमधाम के साथ विसर्जन किया जाता है। यदि आप भी इस बार गणेश चतुर्थी पर बप्पा को अपने घर में लाने की सोच रहे हैं, तो उससे पहले आप इसकी सही तारीख और पूजा करने का शुभ मुहूर्त जरूर जान लें।

हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल गणेश चतुर्थी का उत्सव 31 अगस्त को मनाया जाएगा। ऐसी मान्यता है, कि इसी व्रत को करने से माता पार्वती को उनके प्रथम पुत्र कार्तिकेय मिलने आए थे. 

                     -गणेश चतुर्थी की शुभ मुहूर्त-

हमेशा से यही बताया जाता है की मूर्ति हमेशा घर को सुभ मुहूर्त में ही लाना चाहिए. यदि आप भी अपने घर को गणेश जी की मूर्ति लाना चाहते हैं तब नीचे के मुहूर्त में ही लायें.

लाभ समय : दोपहर 2 बजकर 17 मिनट से 3 बजकर 52 मिनट तक
शुभ समय : सुबह 7 बजकर 58 से 9 बजकर 30 तक

वहीँ शाम की मुहूर्त है : – 06:54 PM to 08:20 PM

अमृत समय : 03:53 PM to 05:17 PM

शुभ समय : 09:32 AM to 11:06 AM

गणेश जी की पूजा को हमेशा ज्यादा अच्छा समझा जाता है अगर आप उसे दोहपर के समय में करें-

11:25 AM से लेकर 01:54 PM के बीच में गणेश जी की पूजा करने के लिए इस मुहूर्त को सबसे बढ़िया माना गया है. 


गणेश चतुर्थी में इस्तमाल किये जाने वाले मन्त्रों में से जो सबसे मुख्य है वो है,

       वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटी समप्रभ .निर्विध्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा …

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात.
ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरु गणेश.
ग्लौम गणपति, ऋद्धि पति, सिद्धि पति. करो दूर क्लेश..
ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा.
दुर्वा अर्पित करते हुए मंत्र बोलें 'इदं दुर्वादलं ऊं गं गणपतये नमः'
 सुमुखश्च एकदंतश्च कपिलो गजकर्णक:
 लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायक: 
  धुम्रकेतुर गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजानन:
  द्वादशैतानि नामानि य: पठेचशृणुयादपि ..
एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्. 

                       -: गणेश मूल मंत्र:-


ऊं श्रीं ह्रीं क्लें ग्लौम गं गणपतये वर वरद सर्वजन जनमय वाशमनये स्वाहा तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुंडाय धिमहि तन्नो दंति प्रचोदयत ओम शांति शांति शांतिः

                    -: गणेश चतुर्थी  की कथा:- 

गणेश चतुर्थी  के सम्बंध मे जो कथा प्रच्लित है वो इस प्रकार है एक बार माता पार्वती स्नान करने जा रही थी. तब उन्होंने द्वार पर पहरेदारी करने के लिए अपने शरीर के मैल से एक पुतला बनाया. और उसमें प्राण डालकर एक सुन्दर बालक का रूप दे दिया. माता पार्वतीबालक को कहती हैं कि मै स्नान करने जा रही हुतुम द्वार पर खड़े रहना और बिना मेरी आज्ञा के किसी को भी द्वार के अंदर मत आने देना. यह कहकर माता पार्वतीउस बालक को द्वार पर खड़ा करके स्नान करने चली जाती हैं.

वह बालक द्वार पर पहरेदारी कर रहा होता है कि तभी वहां पर भगवान् शंकर जी आ जाते हैं और अंदर जैसे ही अंदर जाने वाले होते तो वह बालक उनको वहीँ रोक देता है. भगवान शंकर जी उस बालक को उनके रास्ते से हटने के लिए कहते हैं लेकिन वह बालक माता पार्वती की आज्ञा का पालन करते हुए, भगवान शंकर को अंदर प्रवेश करने से रोकता है. जिसके कारण भगवान शंकर क्रोधित हो जाते हैं और क्रोध में अपनी त्रिशूल निकल कर उस बालक की गर्दन को धड़ से अलग कर देते हैं.

बालक की दर्द भरी आवाज को सुनकर जब माता पार्वती जब बहार आती है तो वो उस बालक के कटे सिर को देखकर बहुत दुखी हो जाती हैं. भगवान् शंकर को बताती है कि वो उनके द्वारा बनाया गया बालक था जो उनकी आज्ञा का पालन कर रहा था. और माता पार्वती उनसे अपने पुत्र को पुन: जीवित करने के लिए बोलती है.

फिर भगवान शंकर अपने सेवकों को आदेश देते हैं कि वो धरतीलोक पर जाये और जिस बच्चे की माँ अपने बच्चे की तरफ पीठ करके सो रही हो, उस बच्चे का सिर काटकर ले आये. सेवक जाते हैं, तो उनको एक हाथी का बच्चा दिखाई देता है. जिसकी माँ उसकी तरफ पीठ करके सो रही होती है. सेवक उस हाथी के बच्चे का सिर काटकर ले आते है.

फिर भगवान् शंकर जी, उस हाथी के सिर को उस बालक के सिर स्थान पर लगाकर उसे पुनः जीवित कर देते हैं. भगवान् शंकर जी, उस बालक को अपने सभी गणों को स्वामी घोषित करते देते है. तभी से उस बालक का नाम गणपति रख दिया जाता है.

साथ ही गणपति को भगवान शंकर देवताओ में सबसे पहले उनकी पूजा होगी ऐसा वरदान भी देते हैं. इसीलिए सबसे पहले उन्ही की पूजा होती है. ऐसा माना जाता है कि उनकी पूजा के बिना कोई भी कार्य पूरा नहीं होता.

                                        ############  गणेशाय नम: #########



 

 

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